ये सच है की ही स्त्रीही मां बन सकती है। परंतु क्या मां बनना वरदान है। मुझे लगता है, नहीं! कितने कष्ट होते है मां बनने में! हम नरों का क्या जाता है मां की महती गांने में! सहनातो स्त्रीयों को ही है। कुछ हरामियों को छायद ये भी कम लगा इसलिए उन्होंने 'पतिव्रता धर्म'के नाम पर स्त्रीयों को झूठा महिमा मंडित करके दबाके रखनेवाला 'झूठा' पातिव्रत धर्म सनातन धर्म में घुसाया। और नराधमों को मुक्त छोड दिया।
'सच्चा पातिव्रत धर्म'
पातिव्रत धर्म का अर्थ आमतौर पर अपने पति(?) के सिवा किसी से संभोग या मैथुन नहीं करना ऐसा समझा जाता है। परंतु ये अर्थ सिमित है। मेरे लिए 'सच्पी' पतिव्रता वही जो किसी 'सत्पुरुष' से विवाह करके उसके सभी अच्छे कार्य में उसके साथ रहती है। हां, अगर दुर्भाग्यवश रावण जैसे किसी नराधम से विवाह(?) हो और उससे निष्ठा रखना भी पातिव्रत्य है। परंतु राष्ट्र के लिए कैकयी, सत्यभामा, राणी लक्ष्मीबाई और सावरकर बंधुओं के स्त्रीयों जैसी पतिव्रताए चाहिए।