Saturday, January 25, 2020

मेरे मरनेके बाद!

मेरे मरनेके बाद ना कोई रोये,
ना कोई आंसू बहाये|
और किसीके नहीं तो
बबूलकेतो बीज बोये||१||
मेरे मरनेकेबाद ना rip लिखे
ना कोई मृसमि|
श्रद्धांजलिके बदले
गौमाता, भूमाताकी रक्षाकी दे हमी||२||
मेरे मरनेके बाद ना करे दशक्रिया
ना करे श्राद्ध|
वंदे मातरम् हो राष्ट्रगान,
जन गण मन रद्द||३||
मेरे मरनेके बाद ना जमे लोग
ना हो शोरगुल|
'मेकाल्लेके स्कूल' हो जाये बंद
शुरू हो जाये गुरूकुल||४||

Tuesday, January 21, 2020

भागवत और अध्यात्मविज्ञान

भागवतमे बहुत ऐसी कथा है जिनके बारेमे हम सोचते है की ऐसा कैसे हो सकता है| लेकिन हममेंसे बहुत लोग अध्यात्मविज्ञान को समझते है‌ इसलिए ऐसा सोचते है। हम जब अध्यात्म‌विज्ञान को समझेंगे तो हमें भी लगेगा ऐसाही हुआ होगा|
उदाहरणके तौरपे भागवतका जो महात्म्य आता है उसमे एक कथा है धुंधकारीकी| धुंधकारी शरीर छोडनेकेबाद इधर उधर भटकता है और आखिर गोकर्ण उसे बांसमे बैठनेको कहता है और बांसमे बैठके भागवत सुननेसें वो मुक्त होता है| मैभी पहलें यही सोचता था की ऐसा कैसे हो सकता है| लेकिन मैं जब सोचने लगा तो मुझे यकीन होगया ऐसाही हुआ होगा|
आपको ये तो मानना ही पडेगा की शरीरमें वायू होती है| आत्मा इससेभी सूक्ष्म है| शरीरमे रहनेवाला वायू वीर्य को गती देता है और अगर उसमे आत्मा हो तोही शुक्राणू-स्त्रीबीजके संगमसे संतानकी उत्पत्ती होती है(मुझे मालूम है आपमेसे बहुत इसपे यकिन नहीं करेंगे लेकिन 'ईश्वरीय प्रेरणासें मैं ये कार्य कर रहा हूॅं, आप माने या ना माने आपकी मर्झी)| इससे सिद्ध होता भागवतमे कुछ गडबडी जरूर हो सकती है लेकीन निश्चितही विज्ञान है|

Monday, January 20, 2020

धर्मवेडा(?) औरंगजेब!

औरंगजेब कट्टर मुसलमान होता आणि केवळ मुसलमान झाला नाही म्हणून संभाजीराजांना मारलं असा एक अपसमज हिंदू समाजात निर्माण केला गेलाय. औरंगजेब कट्टर मुसलमान होता हे खरं आहे पण संभाजीराजांना मुसलमान बनविण्याचा त्याचा आग्रह का यासाठी इस्लाम समजून घेणं आवश्यक आहे. आणि इस्लाम समजून घेण्यासाठी ज्याकडून समजून घेणार तो मुसलमान असला पाहिजे किंवा मुस्लिम त्याचे नातेवाईक असले पाहिजेत. अशी दोन नावं आहेत महेद्रपाल आर्य(मेहबूब अली) आणि अन्वर शेख. त्यांचं साहित्य वाचल्यानंतर मला समजलं की इस्लाम निर्माण करण्यात आला तो मुळी अरबांच्या उत्थानासाठी आणि अरबांचं वर्चस्व रहावं म्हणून. याचाचअर्थ संभाजीनं मुस्लिम होणं म्हणजेच संभाजीनं औरंगजेबाचा 'मंडलिक' होणं. आणि संभाजीराजांना हे माहित असल्यानेच त्यांनी मरण स्विकारलं पण इस्लाम‌ नाही.
लक्षपूर्वक वाचल्याबद्दल आभार आणि धन्यवाद!

Wednesday, January 15, 2020

धर्म

हिंदुस्थानमे वर्तमान समयमे सभी लोगोंसे(अपने आपको धार्मिक कहनेवाले हो या अधर्मी(निधर्मी कहनेवाले हो)) जिस शब्द का गलत उपयोग होता है वो है धर्म। धर्म शब्द की (संस्कृत)व्याख्या है धारयते इति धर्म याने की धारनेवाला जो है धर्म। इस अर्थसे जिवीत या निर्जीव सभी पदार्थोंको अपने 'गुण' और 'धर्म' होंते है(दादा कोंडके का शिवसेंना प्रचारमे मराठीमें एक भाषण है उसमे ये अधिक स्पष्ट‌ होता है)।
ध्यानसे पढनेकेलिए आभार, धर्मवाद!https://www.google.co.in/url?q=https://www.youtube.com/playlist%3Flist%3DPLKSDf7NCLBqezQpivR_jfgor3hYllR1ZI&sa=U&ved=2ahUKEwiZ0LzniofnAhXoGDQIHe2xCwsQFjAAegQIBRAB&usg=AOvVaw1wP68dvF2t7u2zosE1xuFM

धर्म

हिंदुस्थानमे वर्तमान समयमे सभी लोगोंसे(अपने आपको धार्मिक कहनेवाले हो या अधर्मी(निधर्मी कहनेवाले हो)) जिस शब्द का गलत उपयोग होता है वो है धर्म। धर्म शब्द की (संस्कृत)व्याख्या है धारयते इति धर्म याने की धारनेवाला जो है धर्म। इस अर्थसे जिवीत या निर्जीव सभी पदार्थोंको अपने 'गुण' और 'धर्म' होंते है(दादा कोंडके का शिवसेंना प्रचारमे मराठीमें एक भाषण है उसमे ये अधिक स्पष्ट‌ होता है)।
ध्यानसे पढनेकेलिए आभार, धर्मवाद!https://www.google.co.in/url?q=https://www.youtube.com/playlist%3Flist%3DPLKSDf7NCLBqezQpivR_jfgor3hYllR1ZI&sa=U&ved=2ahUKEwiZ0LzniofnAhXoGDQIHe2xCwsQFjAAegQIBRAB&usg=AOvVaw1wP68dvF2t7u2zosE1xuFM

Monday, January 13, 2020

उपवास और शाबू

उप माने पास और वास माने रहना! उपवास का असली अर्थ है (भगवानके)पास रहना ना कीं अनशन.लेकिन भगवानके पास रहनेमे कोई 'त्रास' ना हो इसलिए अनशन करनेको कहा गया है|
लेकिन आज के युगमें लोग रोजका भोजन नहीं करते लेकिन शाबू खाते है| वैसे शाबू दिखनेमे शाकाहार है लेकीन ये मांसाहारसेभी खराब हे| इसके बनानेमे गायकी चर्बी उपयोग की जाती है| उसपर बनते समय तरह-तरहके कींडे गीरते रहते है| इससे शरीरको उपयुक्त कुछ मिलताभी नहीं(ये अठारह दिनतक खाली पडा रहता है(सिर्फ आतोंको त्रास!)| इसलिए साबुदाणा खाके उपवासी(?) होंनेंसे अच्छा है दाल-चावल खायें|