हिंदुस्थानमे वर्तमान समयमे सभी लोगोंसे(अपने आपको धार्मिक कहनेवाले हो या अधर्मी(निधर्मी कहनेवाले हो)) जिस शब्द का गलत उपयोग होता है वो है धर्म। धर्म शब्द की (संस्कृत)व्याख्या है धारयते इति धर्म याने की धारनेवाला जो है धर्म। इस अर्थसे जिवीत या निर्जीव सभी पदार्थोंको अपने 'गुण' और 'धर्म' होंते है(दादा कोंडके का शिवसेंना प्रचारमे मराठीमें एक भाषण है उसमे ये अधिक स्पष्ट होता है)।
ध्यानसे पढनेकेलिए आभार, धर्मवाद!https://www.google.co.in/url?q=https://www.youtube.com/playlist%3Flist%3DPLKSDf7NCLBqezQpivR_jfgor3hYllR1ZI&sa=U&ved=2ahUKEwiZ0LzniofnAhXoGDQIHe2xCwsQFjAAegQIBRAB&usg=AOvVaw1wP68dvF2t7u2zosE1xuFM
Wednesday, January 15, 2020
धर्म
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment