Tuesday, January 21, 2020

भागवत और अध्यात्मविज्ञान

भागवतमे बहुत ऐसी कथा है जिनके बारेमे हम सोचते है की ऐसा कैसे हो सकता है| लेकिन हममेंसे बहुत लोग अध्यात्मविज्ञान को समझते है‌ इसलिए ऐसा सोचते है। हम जब अध्यात्म‌विज्ञान को समझेंगे तो हमें भी लगेगा ऐसाही हुआ होगा|
उदाहरणके तौरपे भागवतका जो महात्म्य आता है उसमे एक कथा है धुंधकारीकी| धुंधकारी शरीर छोडनेकेबाद इधर उधर भटकता है और आखिर गोकर्ण उसे बांसमे बैठनेको कहता है और बांसमे बैठके भागवत सुननेसें वो मुक्त होता है| मैभी पहलें यही सोचता था की ऐसा कैसे हो सकता है| लेकिन मैं जब सोचने लगा तो मुझे यकीन होगया ऐसाही हुआ होगा|
आपको ये तो मानना ही पडेगा की शरीरमें वायू होती है| आत्मा इससेभी सूक्ष्म है| शरीरमे रहनेवाला वायू वीर्य को गती देता है और अगर उसमे आत्मा हो तोही शुक्राणू-स्त्रीबीजके संगमसे संतानकी उत्पत्ती होती है(मुझे मालूम है आपमेसे बहुत इसपे यकिन नहीं करेंगे लेकिन 'ईश्वरीय प्रेरणासें मैं ये कार्य कर रहा हूॅं, आप माने या ना माने आपकी मर्झी)| इससे सिद्ध होता भागवतमे कुछ गडबडी जरूर हो सकती है लेकीन निश्चितही विज्ञान है|

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