Sunday, January 5, 2025

स्त्री: नर्क का द्वार या स्वर्गसुख(आनंद) का भडार?


कुछ कथाकार(?), तथाकथित धर्मग्रंथ बताते है कि स्त्री नर्क का द्वार है। कई मराठी संतों ने भी इस आशय का लेखन अपने ग्रंथों में किया है(हांलांकि उनका उद्देश्य हम जैसे मनुष्य को विषय भोगों में अतिलिप्त होने से बचाया था)। तो हम थोड़ी चर्चा करते है कि क्या स्त्रीया सचमुच में नर्क का द्वार होती है क्या!
हमारे सनातन धर्म में मां कि न केवल महिमा गाई है बल्कि उसे भगवान और परमात्मा का रुप बताया है। तो मां भी तो एक स्त्री होती है। क्या उसे हम नर्क का द्वार कहेंगे! हम बाहर से कितनी भी निंदा करें, परंतु अंदर से तो यौन सुख का आनंद बहुतांश जन चाहते है(कुछ गिने चुने अपवाद हो सकते हैं)। स्वस्थ समाज के लिए सबको वो मिलता या उस सुख की संतुष्टि होना मेरे विचार से तो आवश्यक है। और उसके सिवा जीवन चक्र चल सकना भी बहुत कठीण है(हर कोई क्लोनिंग नहीं कर सकता)। तो मेरे विचार से स्त्री नर्क का द्वार नहीं स्वर्गसुख का भंडार है।

No comments: