इसमें कोई दो राय नहीं हो सकती किं गायन, वादन, नृत्य और अभिनय ये सनातन भारतीय संस्कृति के अभिन्न अंग है परंतु इनके नाम पे आज जो चलचित्र वाहिनियों द्वारा जो परोसा जा रहा है वो केवल संस्कृति ही नहीं अपितु समाज के 'स्वास्थ्य' के लिए भी हानिकारक है। मनोरंजन के नाम पे आज जो समाज में जहर घोला जा रहा हैं वो अत्यंत भयानक है। द्यूत(जुआ), सुरा(शराब), व्यभिचार और मांसाहार का जोर=शोर से प्रचार हो रहा हैं। और इसमें एक बहुत बड़ी विडंबना ये भी है कि जो कल तक भारतीय सभ्यता-संस्कृति के पालक थे उनके ही वंशज इसका बड़ा हिस्सा बन रहें है। बिग बॉस जैसे प्रदर्शन समाज को सिखा देते हैं कि सत्ता(?) हथियाने के लिए कुछ भी करो, अपराध नहीं है। अगर इसे रोका नहीं गया तो आने वाले समय में ये भारतीय सभ्यता-संस्कृति के साथ साथ पुरे 'हिंदू' समाज को भी ध्वस्त कर देगा।
जो जीता(सच के साथ) वही विजेता!
कुछ साल पहले आमिर अभिनीत एक हिंदी फिल्म आई थी, जो जीता वही सिकंदर! कई लोगों के मन में ये सवाल हो सकता है कि अब इस फिल्म का क्या होगा! कई लोग कहेंगे कि इसमें क्या ग़लत था! वे ये भी कहेंगे कि यह कट्टरता है! लेकिन मस्तिष्क-धुलाई धीरे-धीरे की जाती है। यह फिल्म सिखाती है कि कुछ भी करो लेकिन जीतो (और दुश्मन को नष्ट करो)! इससे अपंथीयो के रुख का पता चलता है. और अगर ठीक से अध्ययन किया जाए तो यह ध्यान में आएगा कि विजता एक 'शुद्ध भारतीय' शब्द होने के बावजूद भी सिकंदर का उपयोग फ़ारसी/अरबी मूल के साथ किया जाता है क्योंकि सभ्य(?) डाकू चाहते हैं कि हम उनके दास (गुलाम) बनें। लेकिन इसके बारे में सोचो!
ध्यानपूर्वक पढ़ने और इसमें कुछ करने वालों को धन्यवाद।
जय सिंध, जय भारत, जय 'महा'राष्ट्र और विश्व!
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