कोईभी स्त्री पतीव्रता हो ये अच्छाही है। लेकिन मेरे विचारमे स्रीका पतीव्रता होना काफी नही है, पतिका धर्मनिष्ठ होना(समाजके प्रति, राष्ट्र के प्रति)भी आवश्यक है। अगर औरत पतीव्रता हो लेकिन उसका पती(शादी किया हुआ आदमी)नशेमे, जुएमे या और बुराइमे लिप्त हो या राष्ट्रद्रोही हो तो पतिव्रता चाहे अपने पुरखॉ स्वर्ग दे लेकिन समाज और राष्ट्र केलिये ये हानीही है। अगर हमे समर्थ राष्ट्र बनणं है तो ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र इन चारो वर्णोको धर्मशील और सत्यानुगामी बनाना चाहिए।
जय सिंध, जय महाराष्ट्र!
Tuesday, August 7, 2018
पतीव्रत धर्म: एक चिंतन
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