धर्म का मूल अर्थ है धरना या पकडना याने कोईभी चीज की कुछ propeties होती है वो है धर्म| इसलिए हर वर्णके अपने ऐसे कुछ धर्म है जैसे की ब्राह्मण का सिखना, सिखाना| क्षत्रियोंका धर्भ रक्षण करणा, वैशोंका वितरण करना, शूद्रोंका(ये क्षूद्रोंसे अलग है|) सेवा करना| इससे ये सिद्ध होता है की हिंदूओंके चारो वर्णोंके 'धर्म' अलग है|
Wednesday, February 12, 2020
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