दुनियामें सब सापेक्ष है और स्वच्छता भी इसे अपवाद नहीं है| गंदगी करना नहीं चाहिए इसमें 'दो टूक' नहीं हो सकते मगर 'विचारोंकीभी सफाई' आवश्यक है| हमें सफाईके 'अपने' मानक बनाना चाहिए नां की युरोप या अमरिका. वहां की जलवायू अलग है, मांटी अलग है, तपमान अलग है और सभ्यताभी अलग है| हम कहते हैं की हमारा देश कृषीप्रधान है| तो हमें हमारे देशके मिट्टीसे जुडे रहनाही चाहिए और हमारी संतानोंकोभी जुडा रखना चाहिए(वैसे सबकोही चाहिए)|
आखिरमें:- वैसे हमभी गंदगीसे पैदा हुए और हम जो संतान पैदा करते है वोभि हमारे 'गंदगीसेही' तो होती है|
Saturday, February 22, 2020
गंदगी है जिंदगी!
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